Home > Blogs > Gallbladder Cancer > Overview > पित्ताशय का कैंसर
Dr Harsh Shah, MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology), अपोलो हॉस्पिटल, भाट, गांधीनगर में पित्ताशय के कैंसर के लिए रैडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी करते हैं। परामर्श: Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre, गोता, अहमदाबाद।
⦿ पेट के दाहिने हिस्से में लगातार दर्द: पित्ताशय के क्षेत्र में लंबे समय से रहे दर्द की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ती है, जो स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक संकेत हो सकता है।
⦿ त्वचा और आँखों का पीला होना: त्वचा और आँखें पीली पड़ जाती हैं, जो पित्ताशय के कैंसर का एक महत्वपूर्ण लक्षण है और तत्काल जांच जरूरी है।
⦿ उल्टी और अपच होना: भोजन पचने में कठिनाई या बार-बार उल्टी होना पित्ताशय के कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
⦿ वजन में अनावश्यक कमी: न खाने के कारण या पाचन तंत्र की गड़बड़ी के कारण वजन तेजी से घट सकता है, जो रोग की गंभीरता को दर्शाता है।
⦿ मुँह में कड़वा स्वाद: पित्ताशय के पाचन प्रवाह में परिवर्तन के कारण मुँह में लगातार कड़वाहट रहना लक्षण हो सकता है।
⦿ भूख कम लगना: गले में कुछ भी खाने की इच्छा न होना या भूख न लगना रोग के लक्षणों में से एक है।
⦿ सर्दी या बुखार आना: पित्ताशय में सूजन या संक्रमण होने के कारण थकान महसूस होती है और हल्का बुखार रहता है।
⦿ मल में परिवर्तन होना: मल पीला या सफेद दिखने का कारण पाचन प्रणाली के अवरोध या कैंसर का प्रभाव हो सकता है।
⦿ सांस में दुर्गंध: पित्ताशय के प्रवाह में परिवर्तन के कारण मुँह से दुर्गंध आना या कमजोरी महसूस होना लक्षण बन सकता है।
⦿ आंतरिक दर्द और दबाव लगना: पेट में लगातार दबाव या फुलाव जैसी भावना रहना और वह धीरे-धीरे बढ़ती जाना, जो तत्काल ध्यान में लेने योग्य है।
⦿ पित्ताशय की पथरी: लंबे समय तक पित्ताशय में पथरी रहने से सूजन होती है, जो पित्ताशय के कैंसर के विकास के लिए मुख्य कारक बन सकती है।
⦿ धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन: आदतें पित्ताशय की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती हैं, जो संक्रमण और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
⦿ वसायुक्त और प्रसंस्कृत आहार: अधिक वसायुक्त या प्रसंस्कृत खाद्य पित्ताशय पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और लंबी अवधि में रोगों की संभावना बढ़ा सकते हैं।
⦿ आनुवांशिक कारक: परिवार में पित्ताशय के कैंसर का इतिहास हो, तो इस रोग के होने का जोखिम अधिक होता है।
⦿ जीवाणु या संक्रमण: हेपेटाइटिस बी या सी जैसे वायरस के संक्रमण पित्ताशय के पाचन प्रवाह को नुकसान पहुँचाकर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
⦿ पाचन तंत्र के अन्य रोग: पैनक्रिएटिटिस या गैस्ट्रिक समस्याएँ पित्ताशय के ऊतकों पर लंबे समय तक प्रभाव डाल सकती हैं।
⦿ रासायनिक और विषैले पदार्थ: रासायनिक पदार्थ या कीटनाशक पदार्थों के संपर्क में रहना पित्ताशय की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।
⦿ मोटापा और अनियमित जीवनशैली: अधिक वजन और उच्च कोलेस्ट्रॉल पित्ताशय में तनाव पैदा करते हैं, जो कैंसर के जोखिम के लिए जिम्मेदार बनते हैं।
⦿ लंबे समय तक सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन: अनावश्यक कैफीन और शुगर वाले पेय पित्ताशय में अवरोध और कैंसर के विकास के लिए प्रेरक बनते हैं।
⦿ उम्र और लिंग: पित्ताशय का कैंसर ज्यादातर 50 वर्ष से ऊपर के लोगों में देखा जाता है, और कुछ अध्ययनों में महिलाओं में इसका अनुपात अधिक है।
⦿ अल्ट्रासाउंड: पित्ताशय के क्षेत्र में अवरोध या असामान्य वृद्धि का पता लगाने के लिए पहली तकनीक है, जिससे तत्काल जानकारी मिल सकती है।
⦿ सीटी स्कैन (CT Scan): पित्ताशय और उसके आसपास के अंगों में कैंसर की स्थिति और फैलाव का अंदाजा लगाने के लिए उपयोग होता है।
⦿ एमआरआई (MRI): पित्ताशय के नरम ऊतक और प्रवाह के कारकों का पता लगाने के लिए उन्नत तकनीक है, जो अधिक सटीकता प्रदान करती है।
⦿ बायोप्सी: पित्ताशय के घाव के नमूनों को लेकर यह निर्धारित किया जाता है कि वह कैंसरजन्य है या नहीं, जो निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
⦿ एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS): पित्ताशय के अंदर ट्यूमर या संक्रमण के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए यह पद्धति उपयोगी है।
⦿ पेट स्कैन (PET Scan): कैंसर की कोशिकाओं की गतिविधि और उसके शरीर के अन्य भागों में फैलाव के बारे में जानने के लिए यह तकनीक उपयोग होती है।
⦿ रक्त की जांच: ट्यूमर मार्कर्स जैसे कि CA 19-9 जैसे रासायनिक तत्वों का स्तर जानकर कैंसर की उपस्थिति का अंदाजा लगाना।
⦿ एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंगियोपैनक्रेटोग्राफी (ERCP): यह पद्धति पित्ताशय और पित्तनली में अवरोध या गांठ की जांच के लिए की जाती है।
⦿ जरूरत पड़ने पर सर्जिकल निदान: यदि मेडिकल स्कैन से पूरी जानकारी न मिले, तो सर्जरी द्वारा पित्ताशय के नमूने की जांच की जाती है।
⦿ जैविक परीक्षण: विशेष आणविक जांचों से कैंसर के मूल और उसके जैविक स्वरूप को जानने के लिए यह पद्धति अपनाई जाती है।
⦿ सर्जरी: पित्ताशय या उसके आसपास की प्रभावित कोशिकाओं को हटाने के लिए की जा सकती है। शुरुआती चरण के कैंसर के लिए यह सबसे प्रभावी उपचार है।
⦿ कीमोथेरेपी: कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाओं का उपयोग होता है। यह उपचार अधिक चरण के कैंसर के फैलाव को नियंत्रित करने में सहायक है।
⦿ रेडियेशन थेरेपी: विकिरणों की मदद से कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। यह विशेष रूप से ट्यूमर को छोटा करने या सर्जरी से पहले उपयोगी है।
⦿ टारगेटेड थेरेपी: कैंसर के विशिष्ट अणुओं को निशाना बनाकर उसकी वृद्धि को रोकने वाली यह पद्धति मरीजों के लिए नवीन विकल्प है।
⦿ इम्यूनोथेरेपी: शरीर के रोगप्रतिरोधक तंत्र को मजबूत बनाकर कैंसर की कोशिकाओं के खिलाफ लड़ने में मदद करता है। यह पद्धति विशेष रूप से मेटास्टेटिक कैंसर में उपयोगी है।
⦿ एंडोस्कोपिक उपचार: शुरुआती कैंसर के मामलों में पित्ताशय में घाव को हटाने के लिए कम आक्रामक उपचार पद्धति है।
⦿ पल्लिएटिव देखभाल: यदि कैंसर पर्याप्त रूप से फैल गया हो तो मरीज के दर्द का नियंत्रण और आराम प्रदान करने के लिए यह उपचार दिया जाता है।
⦿ आहार प्रबंधन: पौष्टिक और कम वसायुक्त भोजन द्वारा शारीरिक शक्ति को सुधारने में मदद करता है, विशेष रूप से उपचार के बाद।
⦿ क्लिनिकल ट्रायल्स: नवीन उपचार विकल्पों की परीक्षण पद्धति में भाग लेकर उन्नत उपचार प्राप्त करने की संभावना उपलब्ध होती है।
⦿ लेजर थेरेपी: लेजर तकनीक का उपयोग करके ट्यूमर या अवरोध को हटाने के लिए अधिक सटीक पद्धति उपयोग होती है।
| उपचार | संकेत | सामान्य दुष्प्रभाव | अपेक्षित परिणाम |
|---|---|---|---|
| सर्जरी | यदि कैंसर शुरुआती चरण में हो और पित्ताशय को हटाना संभव हो | दर्द, पाचन समस्या, अस्थायी वजन घटाना | कैंसरग्रस्त भाग हटाकर रोग नियंत्रण |
| कीमोथेरेपी | कैंसर अधिक फैला हो या सर्जरी के बाद के उपचार के लिए | उल्टी, बाल झड़ना, शारीरिक थकान | कैंसर की वृद्धि में अवरोध लाना |
| रेडियेशन थेरेपी | ट्यूमर को छोटा करना या सर्जरी के बाद बढ़ते कैंसर का नियंत्रण | त्वचा पर लालिमा, थकान, संक्रमण की संभावना | ट्यूमर की वृद्धि रोकना या छोटा करना |
| टारगेटेड थेरेपी | यदि कैंसर विशेष अणु पर आधारित होकर बढ़ता हो | एलर्जी प्रतिक्रिया, त्वचा समस्या | कैंसर की विशेष कोशिकाओं को निशाना बनाकर नष्ट करना |
| इम्यूनोथेरेपी | यदि कैंसर रोगप्रतिरोधक तंत्र को नजरअंदाज कर तेजी से फैले | बुखार, थकान, सांस की समस्या | शरीर के प्रतिकारक तंत्र से कैंसर के खिलाफ लड़ना |
| एंडोस्कोपिक उपचार | ट्यूमर को हटाने के लिए कम आक्रामक पद्धति | रक्तस्राव, गले या पेट में थोड़ी असहजता | ट्यूमर हटाना और पाचन सुधारना |
| लेजर थेरेपी | यदि कैंसर अवरोध उत्पन्न करे और खाने-पीने में कठिनाई हो | तत्काल सूजन, हल्की असहजता | ट्यूमर हटाकर पित्ताशय का कार्य सुधारना |
| पल्लिएटिव केयर | कैंसर आगे बढ़ गया हो और उपचार संभव न हो | दर्द नियंत्रण, थकान कम करने की दवाएं | मरीज को आराम और मानसिक शांति प्रदान करना |
| आहार प्रबंधन | पाचन संबंधी समस्या कम करने और शरीर की शक्ति बनाए रखने के लिए | पाचन समस्याएं, कम भूख | पौष्टिक भोजन द्वारा शरीर का स्वास्थ्य सुधारना |
| क्लिनिकल ट्रायल्स | यदि रोग पर उन्नत उपचार के विकल्प उपलब्ध हों | अज्ञात दुष्प्रभाव, संभावित फायदे-नुकसान | नवीन तकनीक से सफलता प्राप्त करने की संभावना |
हाँ, यदि परिवार में किसी को पित्ताशय या हेपेटोबिलियरी कैंसर हुआ हो, तो उस व्यक्ति को पित्ताशय के कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है।
MS, MCh (G I cancer Surgeon)
डॉ. हर्ष शाह अहमदाबाद के एक प्रसिद्ध जीआई और एचपीबी रोबोटिक कैंसर सर्जन हैं। वे भोजन नली, पेट, लीवर, पैंक्रियास, बड़ी आंत, मलाशय और छोटी आंत के कैंसर का इलाज करते हैं। वे अपोलो अस्पताल में उपलब्ध हैं।
पित्ताशय के कैंसर की सर्जरी (radical cholecystectomy) का खर्च Apollo Hospital, Bhat में लगभग ₹3,50,000 से ₹7,00,000 तक आता है।
अंतिम राशि इन बातों पर निर्भर करती है — ऑपरेशन किस पद्धति से हुआ (open, laparoscopic या robotic), अस्पताल में कितने दिन रुकना पड़ा, ICU की ज़रूरत पड़ी या नहीं, और इलाज insurance या cashless के तहत है या नहीं।
आपके केस के अनुसार सटीक अनुमान consultation के बाद ही दिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए +91 63590 11009 पर संपर्क करें।