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कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर: क्या नई इम्यूनोथेरेपी इलाज को और बेहतर बना सकती है

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कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर क्या नई इम्यूनोथेरेपी इलाज को और बेहतर बना सकती है-Atezolizumab plus Cancer.-DOI 10.1056NEJMoa2507874

कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर के तीसरे चरण (Stage III) में आमतौर पर सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी (Chemotherapy) दी जाती है। हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल ट्रायल (Clinical Trial) में एक खास किस्म के कैंसर ट्यूमर पर शोध किया गया। इस ट्यूमर को ‘मिसमैच रिपेयर डेफिसिएंट’ (dMMR) कहा जाता है। डॉक्टरों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या सामान्य कीमोथेरेपी के साथ ‘एटिज़ोलिज़ुमैब’ (Atezolizumab) नामक दवा जोड़ने से मरीजों के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।

नए शोध के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे।

वैज्ञानिकों ने 700 से अधिक मरीजों पर अध्ययन किया। एक समूह को केवल मानक कीमोथेरेपी दी गई, जबकि दूसरे समूह को कीमोथेरेपी के साथ इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy) वाली यह नई दवा दी गई। तीन साल बाद देखा गया कि जिन मरीजों को यह संयुक्त इलाज मिला, उनमें कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा बहुत कम हो गया। आंकड़ों के अनुसार, इस नए तरीके से इलाज कराने वाले 86% से ज्यादा मरीज बीमारी से मुक्त रहे। यह पुरानी पद्धति के मुकाबले काफी बेहतर परिणाम है।

मरीजों के लिए इसका क्या मतलब है ?

अगर किसी मरीज को कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर है और उसकी रिपोर्ट में dMMR की स्थिति दिखाई देती है, तो यह नई दवा जीवन रक्षक साबित हो सकती है। यह दवा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार करती है। हालांकि, इस दवा के साथ कुछ साइड इफेक्ट्स (Side effects) की संभावना बढ़ सकती है, इसलिए डॉक्टर मरीज की सेहत और उम्र को ध्यान में रखकर ही इसे शुरू करने का फैसला लेते हैं।

अगला कदम क्या होना चाहिए?

कैंसर का निदान होने पर बायोप्सी (Biopsy) रिपोर्ट में ट्यूमर के प्रकार की बारीकी से जांच जरूरी है। मरीजों को अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए कि क्या उनका ट्यूमर dMMR श्रेणी में आता है। यदि ऐसा है, तो इम्यूनोथेरेपी और कीमोथेरेपी का यह तालमेल एक सुरक्षित भविष्य की उम्मीद देता है। सही समय पर सही तकनीक और दवाओं का चुनाव ही कैंसर को हराने का सबसे प्रभावी रास्ता है।

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Dr Harsh Shah - GI & HPB Oncosurgeon in Ahmeadbad
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