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रीढ़ की हड्डी की चोट वाले मरीजों में पित्ताशय की पथरी का बढ़ता खतरा

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रीढ़ की हड्डी की चोट वाले मरीजों में पित्ताशय की पथरी का बढ़ता खतरा-Prevalence and risk factors of A crosss-DOI 10.1371journal

क्या रीढ़ की हड्डी की चोट (Spinal cord injury) और पित्ताशय की पथरी (Gallbladder Stone) के बीच कोई संबंध है? हाल ही में हुए एक बड़े शोध (Research) में यह सामने आया है कि जिन लोगों को रीढ़ की हड्डी में चोट लगती है, उनमें पित्ताशय की पथरी होने की संभावना काफी अधिक होती है। लगभग 18.89% मरीजों में यह समस्या देखी गई है। इसका मुख्य कारण शरीर की गतिशीलता (Mobility) कम होना और पाचन तंत्र की कार्यक्षमता में बदलाव आना है।

रीढ़ की हड्डी की चोट वाले मरीजों में किन बातों का खतरा है?

रिसर्च के अनुसार 50 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में पित्ताशय की पथरी (Gallbladder Stone) होने का जोखिम बहुत ज्यादा होता है। इसके साथ ही जिन मरीजों के शरीर में शुगर लेवल (Blood glucose) बढ़ा हुआ रहता है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। शरीर के निचले हिस्सों में गतिविधि या मोटर फंक्शन (Motor function) की कमी भी इस समस्या को बढ़ावा देती है।

पित्ताशय की पथरी से बचने के उपाय

अगर आपको या आपके किसी परिजन को रीढ़ की हड्डी की चोट लगी है, तो समय-समय पर अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) करवाना जरूरी है। अपने खान-पान पर ध्यान दें और ब्लड शुगर को नियंत्रण (Control) में रखें। सक्रिय जीवनशैली अपनाने की कोशिश करें, भले ही वह फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) के माध्यम से हो। सही समय पर लक्षणों की पहचान करने से सर्जरी (Surgery) या अन्य गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

डॉक्टर से सलाह लेना कब जरूरी है?

यदि आपको पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द, मतली या उल्टी महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। रीढ़ की हड्डी की चोट वाले मरीजों में दर्द के लक्षण कभी-कभी सामान्य लोगों से अलग हो सकते हैं। नियमित जांच और सक्रिय निगरानी (Monitoring) से जीवन की गुणवत्ता (Quality of life) को बेहतर बनाया जा सकता है

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