Shah's Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre · अहमदाबाद और गांधीनगर
पित्त नली के cancer के surgeon, अहमदाबाद · Gota OPD, Gota, अहमदाबाद · Apollo Hospital, भाट, गांधीनगर
अंतिम अपडेट: 16-Oct-2026
जहाँ पित्त की नलियाँ लिवर से बाहर निकलती हैं, वहाँ की गाँठ को perihilar cholangiocarcinoma कहते हैं। इसका ऑपरेशन बड़ा है। तारीख़ से पहले तीन बातें तय होती हैं: गाँठ निकल सकती है या नहीं, बचा लिवर काफ़ी है या नहीं, और पित्त किस तरफ़ से निकाला जाए।
रिपोर्ट में अक्सर “hilar mass”, “hilar stricture” या Klatskin tumour लिखा होता है। कई बार परिवार के आने तक stent लग चुका होता है। ऐसे में दो सवाल सबके मन में होते हैं। क्या यह ऑपरेशन से निकलेगी? और यह ऑपरेशन किससे करवाएँ? यह पन्ना बताता है कि Dr Harsh Shah इन सवालों का जवाब किस क्रम में ढूँढते हैं। कौन-सी बात जवाब बदल देती है, दूसरी राय कब काम की है, और consent पर हस्ताक्षर से पहले क्या पूछें, यह भी यहाँ है। पित्ताशय और पित्त नली के चार तरह के cancer का फ़र्क़ Dr Shah के गाँठ की जगह से तय ऑपरेशन वाले पन्ने पर है।
हर perihilar गाँठ इलाज से पहले tumour board में जाती है। Dr Harsh Shah केस रखते हैं, परिवार को योजना समझाते हैं और ऑपरेशन ख़ुद करते हैं।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre. Surgical gastroenterology में super-specialty प्रशिक्षण, उसी विषय में दो उच्च डिग्रियाँ, और GI व cancer surgery में 18 वर्ष का अनुभव। लिवर, पित्त नली और अग्न्याशय के ऑपरेशन उनके रोज़ के काम का बड़ा हिस्सा हैं। जो surgeon आपके scan पढ़ते हैं, वही ऑपरेशन करते हैं।
Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Registered with Gujarat Medical Council, Reg. No. G-38738
Gastro & Cancer Surgeon · Apollo Hospital, भाट, गांधीनगर · Gota OPD, अहमदाबाद
Google rating: Gota clinic पर 216 reviews में 4.89, और Apollo, भाट पर 18 reviews में 4.94।
पित्ताशय और पित्त नली के सभी cancer में इस ऑपरेशन का जोखिम ज़्यादा है। और इसका फ़ैसला ज़्यादातर scan देखकर होता है। इसलिए किसी एक रिपोर्ट से कुछ तय नहीं होता। Radiologist, ERCP करने वाले gastroenterologist, cancer के physician और pathologist, surgeon के साथ एक ही scan देखते हैं। जिन केस में शिरा (vein) दोबारा बनानी पड़ सकती है, या लिवर को पहले बढ़ाना है, वे सब board में जाते हैं। फिर Dr Shah आपके और परिवार के साथ बैठते हैं। योजना, उसके कारण, और कौन-सा दूसरा रास्ता सोचा गया, सब समझाते हैं। ऑपरेशन के दिन शुरू से आख़िर तक वही ऑपरेशन करते हैं। गाँठ पूरी और सुरक्षित निकले, इसी हिसाब से ऑपरेशन का तरीका चुना जाता है। यह consent के समय, हस्ताक्षर से पहले बताया जाता है।
लिवर के मुहाने पर नली सिकुड़ी हो, तो जब तक कुछ और साबित न हो, उसे cancer माना जाता है। Brushing की रिपोर्ट साफ़ आए, तब भी cancer ख़ारिज नहीं होता।
| सवाल | इलाज का नियम क्या कहता है |
|---|---|
| बिना दर्द का पीलिया, और नली में ऊपर की ओर रुकावट। | जब तक कुछ और साबित न हो, पित्त नली का cancer माना जाता है। |
| ERCP में brushing या biopsy साफ़ आई। | इससे cancer ख़ारिज नहीं होता। ये नमूने अक्सर cancer पकड़ नहीं पाते। |
| क्या ऑपरेशन से पहले biopsy ज़रूरी है? | गाँठ साफ़ तौर पर निकलने लायक हो तो नहीं। Chemotherapy से पहले ज़रूरी है। |
| क्या endoscope से गाँठ में सुई डालें? | निकलने लायक गाँठ में इससे बचा जाता है। इससे कोशिकाएँ फैल सकती हैं, और बाद में transplant का रास्ता बंद हो सकता है। |
| क्या यह बिना cancer वाली सिकुड़न हो सकती है? | Benign stricture और लंबे समय का PSC देखने में मिलते-जुलते हैं। Scan, खून की जाँच और board मिलकर तय करते हैं। |
पीलिया गहरा हो या नली में infection हो, तो CA 19-9 का आँकड़ा अक्सर ऊँचा आता है। इसलिए पहली मुलाक़ात का ऊँचा आँकड़ा भ्रम पैदा कर सकता है। पित्त निकल जाने के बाद यह जाँच दोबारा होती है। पित्ताशय का cancer या नली के निचले हिस्से का cancer भी ऊपर तक पहुँच सकता है। उनके ऑपरेशन अलग हैं। अग्न्याशय के पास की गाँठ के लिए पित्त नली के निचले हिस्से का cancer वाला पन्ना देखें।
Multiphase CT और MRCP के साथ MRI ज़्यादातर काम करते हैं। MRCP दिखाता है कि गाँठ हर नली में कितनी ऊपर चढ़ी है। वही ऑपरेशन तय करता है।
| जाँच | यह क्या तय करती है |
|---|---|
| छाती, पेट और पेड़ू का multiphase CT। | लिवर के बाहर फैलाव, और गाँठ किन खून की नलियों को छूती है। |
| MRCP के साथ MRI। | हर तरफ़ नली कितनी ऊँचाई और लंबाई तक रुकी है। |
| CA 19-9 और CEA। | शुरुआती आँकड़ा। पीलिया उतरने के बाद दोबारा देखा जाता है। |
| Blood count, किडनी और लिवर की जाँच, albumin, INR और hepatitis की जाँच। | शरीर की ताक़त, खून जमने की क्षमता, और जो लिवर बचेगा उसकी सेहत। |
| लिवर के आकार का माप (volumetry)। | पीछे बचने वाला हिस्सा काफ़ी बड़ा है या नहीं। |
Surgeon इस नक्शे को Bismuth-Corlette type के रूप में दर्ज करते हैं। यह बताता है कि गाँठ दाईं और बाईं नली में कितनी ऊपर गई है। जिस तरफ़ गाँठ ज़्यादा ऊपर गई हो, आम तौर पर वही तरफ़ निकाली जाती है। कम असर वाली तरफ़ बचती है, और फिर पूरा काम उसी को सँभालना होता है। इसलिए scan अच्छी गुणवत्ता के हों, और ऑपरेशन करने वाली टीम ही उन्हें पढ़े। Stent लगने के बाद नलियाँ scan में धुँधली दिखती हैं। जहाँ संभव हो, MRCP stent से पहले कराया जाता है।
दो बातें एक साथ सही होनी चाहिए। पूरी गाँठ साफ़ किनारे के साथ निकले। और जो लिवर बचे वह काफ़ी हो, और उससे पित्त ठीक से बहता हो।
| आम तौर पर निकल सकता है, जब | आम तौर पर नहीं निकलता, जब |
|---|---|
| नली का जितना हिस्सा रुका है, उसे निकाला जा सके। | दोनों तरफ़ की छोटी नलियों तक गाँठ पहुँची हो। |
| बचने वाला लिवर काफ़ी हो और उससे पित्त निकल रहा हो। | दोनों तरफ़ की खून की नलियाँ घिरी हों। |
| ज़रूरत पड़े तो खून की नली दोबारा बनाई जा सके। | एक तरफ़ का लिवर सिकुड़ गया हो और दूसरी तरफ़ की खून की नलियाँ घिरी हों। |
| दूर के अंगों में फैलाव न हो। | Cancer दूर के अंगों तक फैल गया हो। |
शरीर की ताक़त भी scan जितनी ही अहम है। जो व्यक्ति पूरी तरह सक्रिय हैं, उनके लिए बड़ा लिवर ऑपरेशन सोचा जा सकता है। रोज़ के काम में दिक़्क़त हो, तो हल्का इलाज बेहतर बैठता है। जो ज़्यादातर बिस्तर पर हैं, उन्हें पित्त निकालने का इलाज और राहत की देखभाल मिलती है। उम्र नहीं, आप क्या कर पाते हैं, यह देखा जाता है। अगर board को लगे कि गाँठ नहीं निकल सकती, तो कारण के साथ साफ़ बताया जाता है। बहुत थोड़े, ख़ास चुने हुए मरीज़ों को transplant के विशेष केंद्र में भेजने की बात होती है। वहाँ पहले chemoradiation होता है, और फ़ैसला वही केंद्र लेता है।
इस ऑपरेशन में लिवर का बड़ा हिस्सा निकलता है। बचने वाला हिस्सा छोटा लगे, तो पहले दूसरी तरफ़ की portal vein बंद करके उसे बढ़ाया जाता है।
इसे portal vein embolisation (PVE) कहते हैं। Radiologist उस तरफ़ की शिरा बंद करते हैं जो निकाली जानी है। अगले कुछ हफ़्तों में दूसरी तरफ़ बढ़ती है। फिर आकार दोबारा नापा जाता है। ऑपरेशन के बाद लिवर का काम न कर पाना, इस ऑपरेशन के बाद मौत का मुख्य कारण है। इसलिए समय बचाने के लिए यह क़दम कभी छोड़ा नहीं जाता। इसकी योजना पित्त निकालने के साथ ही, शुरुआत में बनती है। Chemotherapy या सूजन से कमज़ोर लिवर में ज़्यादा हिस्सा छोड़ना पड़ता है। आपके लिवर के लिए कितना हिस्सा चाहिए, यह board तय करता है।
सिर्फ़ लिवर की उस तरफ़ से पित्त निकाला जाता है जो ऑपरेशन के बाद बचेगी। निकाली जाने वाली तरफ़ stent लगाने से infection का जोखिम बढ़ता है, फ़ायदा कुछ नहीं।
Endoscope से, यानी ERCP से पित्त निकालना पहली पसंद है। Endoscope न पहुँचे, या नलियों की बनावट ऐसी हो, तो त्वचा से होकर नली (PTBD) डाली जाती है। बड़े लिवर ऑपरेशन से पहले पीलिया उतरना चाहिए। निकलने लायक गाँठ का न निकलने लायक बन जाना, इसका आम कारण stent के बाद नली में हुआ infection है। इसलिए antibiotic दी जाती है, यह देखा जाता है कि पित्त सच में निकल रहा है, और जहाँ से पित्त न निकले वहाँ stent नहीं लगाया जाता। Stent वाली नली में कीटाणु होते हैं, इसलिए पित्त का culture भेजा जाता है। ऑपरेशन के समय की antibiotic उसी से तय होती है। Stent के बाद कँपकँपी के साथ बुख़ार आए, तो यह आपात स्थिति है। उसी दिन +91-63555-64601 पर फ़ोन करें।
पित्त नली, लिवर का बड़ा हिस्सा और caudate lobe एक ही टुकड़े में निकाले जाते हैं। फिर छोटी आँत का एक हिस्सा नलियों से जोड़ा जाता है।
लंबे समय का नतीजा दो बातों पर टिका है। एक, साफ़ किनारा। दो, lymph nodes की पूरी सफ़ाई। ऊपर का हर क़दम इन्हीं दो के लिए है।
गाँठ न निकल सके, तो इलाज का मक़सद उसे क़ाबू में रखना और पित्त बहता रखना है। दवा, पित्त की नली और राहत की देखभाल शुरू से साथ चलती हैं।
| ज़रूरत | क्या इस्तेमाल होता है |
|---|---|
| सक्षम मरीज़ में cancer पर क़ाबू। | Cisplatin और gemcitabine, साथ में durvalumab या pembrolizumab। Immunotherapy न दी जा सके तो सिर्फ़ cisplatin और gemcitabine। |
| पहली दवा काम करना बंद कर दे तब। | FOLFOX, या gene test में मेल मिले तो targeted दवा। |
| खुजली, पीलिया या नली में infection। | Stent या नली, और ज़रूरत पर antibiotic। |
| आराम, वज़न और भूख। | जल्दी palliative care, पोषण की मदद और दर्द की दवा। |
Chemotherapy शुरू करने से पहले गाँठ के टुकड़े की जाँच ज़रूरी है। गाँठ का gene test जल्दी भेजा जाता है, ताकि दूसरी दवा की ज़रूरत पड़ने तक रिपोर्ट हाथ में हो। उस जाँच और targeted दवा की उपलब्धता और खर्च पर शुरुआत में ही खुलकर बात होती है। कम ताक़त वाले मरीज़ को हल्की दवा दी जाती है। बिस्तर पर रहने वाले मरीज़ को पित्त निकालने का इलाज और राहत की देखभाल मिलती है।
पित्त निकालने के साथ-साथ तैयारी भी चलती है। खून जमना, hemoglobin, शुगर और पोषण सुधारे जाते हैं, और consent से पहले जोखिम सरल भाषा में समझाए जाते हैं।
| क्या किया जाता है | क्यों |
|---|---|
| Vitamin K, और hemoglobin व शुगर पर क़ाबू। | पीलिया में खून जमने की क्षमता घटती है। अच्छा hemoglobin ऑपरेशन को सुरक्षित बनाता है। |
| ज़रूरत हो तो पोषण और कसरत का कार्यक्रम। | मज़बूत शरीर बड़े लिवर ऑपरेशन से बेहतर उबरता है। |
| ऑपरेशन से कम से कम चार हफ़्ते पहले बीड़ी, सिगरेट और शराब बंद। | दोनों infection और फेफड़ों की दिक़्क़त का जोखिम बढ़ाते हैं। |
| Stent या नली से पित्त का culture। | ऑपरेशन के समय की antibiotic उसी हिसाब से चुनी जाती है। |
| ऑपरेशन से पहले मीठा पेय, और छोटा उपवास। | खाना छह घंटे पहले और पानी जैसा तरल दो घंटे पहले बंद। |
| ऑपरेशन के बाद चार हफ़्ते खून का थक्का रोकने के injection। | पेट के बड़े ऑपरेशन के बाद पैरों में थक्के का जोखिम बढ़ता है। |
ऑपरेशन के बाद लिवर की खून की जाँचों से प्रगति देखी जाती है। पाँचवें दिन का bilirubin और INR बताते हैं कि बचा लिवर काम सँभाल रहा है या नहीं।
| दिन | क्या होता है |
|---|---|
| ऑपरेशन का दिन। | साँस की नली निकलती है। बिस्तर से उठाकर बिठाया जाता है। पानी जैसा तरल। लिवर की पहली जाँच। |
| अगला दिन। | जितना हो सके खाना। तीन बार चलना। पेशाब की नली निकलती है। Drain में पित्त है या नहीं, देखा जाता है। |
| दूसरा दिन। | पूरा खाना। चार बार चलना। ड्रिप की जगह दर्द की गोली। |
| तीसरे से पाँचवाँ दिन। | पाँचवें दिन का bilirubin और INR पढ़ा जाता है। Drain में पित्त न हो तो निकाल दिया जाता है। |
| घर जाना। | साधारण लिवर ऑपरेशन से देर से। Bilirubin और INR सुधरते हुए होने चाहिए। |
घर जाने से पहले आप खा सकें, अपने आप चल सकें, एक दिन बुख़ार न हो, और दर्द गोली से क़ाबू में हो, यह ज़रूरी है। Drain रहे तो परिवार के एक सदस्य को उसकी देखभाल सिखाई जाती है। एक नियम हर मरीज़ को बचाता है। तीसरे दिन के बाद bilirubin और INR बढ़ें, drain में पित्त आए, बुख़ार, कँपकँपी या तेज़ धड़कन हो, तो consultant surgeon को तुरंत बुलाया जाता है। उलझन, कम पेशाब या फूला, तना हुआ पेट हो, तब भी।
पित्त नली के cancer के ऑपरेशनों में इसका जोखिम ज़्यादा है। आपके अपने आँकड़े, मौत के जोखिम समेत, consent की मुलाक़ात में इसी ऑपरेशन के लिए बताए जाते हैं।
सामान्य जोखिम: खून चढ़ाना पड़े इतनी bleeding, घाव में infection, पैर या फेफड़े में खून का थक्का, दिल या साँस की दिक़्क़त, और anaesthesia से जुड़ी दिक़्क़त। इस ऑपरेशन के जोखिम: ऑपरेशन के बाद लिवर का काम न कर पाना (post-hepatectomy liver failure), नए जोड़ से पित्त रिसना (bile leak), पेट में पीप, पित्त नली में infection (cholangitis), ऑपरेशन के बाद bleeding, लिवर की शिरा या धमनी में थक्का, पेट या छाती में पानी, और दोबारा ऑपरेशन। लंबे समय में: जोड़ सिकुड़कर बार-बार infection ला सकता है, और चीरे की जगह hernia हो सकता है। इस जोड़ के बाद cholangitis ज़िंदगी में कभी भी हो सकता है। पेट खोलने पर फैलाव मिले, तो ऑपरेशन बीच में रोकना पड़ सकता है। असली stage और किनारे की स्थिति रिपोर्ट के बाद ही पता चलती है। पूरी गाँठ निकलने के बाद भी cancer लौट सकता है। Dr Shah चार बातें ख़ुद समझाते हैं: लिवर फ़ेल होने और मौत का जोखिम, ज़िंदगी भर का cholangitis, ऑपरेशन रोकने की संभावना, और बाद में आम तौर पर दी जाने वाली दवा।
गाँठ निकलने के बाद ज़्यादातर मरीज़ों को छह महीने capecitabine गोली की सलाह दी जाती है, ऑपरेशन के आठ से बारह हफ़्ते के भीतर शुरू। फिर कम से कम पाँच साल जाँच चलती है।
| कब | क्या जाँचा जाता है |
|---|---|
| दो हफ़्ते पर। | घाव, drain, पोषण, और pathology रिपोर्ट व उसके किनारे। |
| दो साल तक हर तीन महीने। | तकलीफ़ें, वज़न, ताक़त, CA 19-9 और लिवर की जाँच। |
| तीसरे से पाँचवें साल तक हर छह महीने। | वही जाँचें। |
| CT scan। | दो साल तक हर तीन से छह महीने, फिर पाँच साल तक हर छह महीने। |
| MRCP के साथ MRI। | जब यह अलग करना हो कि जोड़ सिकुड़ा है या cancer लौटा है। |
किनारे में cancer की कोशिकाएँ हों या nodes में cancer हो, ऐसे चुने हुए केस में ही chemotherapy के साथ radiotherapy जोड़ी जाती है। यह board तय करता है। एक आदत ज़िंदगी भर रखनी है: बुख़ार के साथ पीलिया दिखे, तो उसी दिन आएँ, इंतज़ार न करें।
दूसरी राय पहला stent लगने से पहले, और ऑपरेशन से पहले ख़ास काम की है। नीचे का कोई क़दम छूट गया हो या समझाया न गया हो, तो लें।
| आपको क्या दिखे | इसका मतलब |
|---|---|
| Stent या नली लिवर की उस तरफ़ लगी जो निकाली जानी है। | Infection का जोखिम बढ़ता है, और बचने वाली तरफ़ को फ़ायदा नहीं। |
| Board के बिना, एक scan देखकर “नहीं निकलेगी” कह दिया गया। | कुछ गाँठें लिवर बढ़ाने के बाद या शिरा दोबारा बनाकर निकल सकती हैं। |
| बचने वाले लिवर का माप किसी ने नहीं लिया। | छोटा हिस्सा बचना ऑपरेशन के बाद मौत का मुख्य कारण है। |
| योजना में caudate lobe निकालने की बात नहीं है। | यह छूट जाए तो cancer छूट सकता है। |
| पीलिया अभी गहरा है या नली में infection है, फिर भी ऑपरेशन तय हो गया। | लिवर को पहले पित्त निकलने और समय की ज़रूरत है। |
| निकलने लायक गाँठ में endoscope से सुई डालना तय हुआ। | कोशिकाएँ फैल सकती हैं, और transplant का रास्ता बंद हो सकता है। |
आपकी योजना से सहमत दूसरी राय बेकार नहीं है। आप ऑपरेशन में कोई सवाल बाक़ी रखे बिना जाते हैं। CT और MRCP की CD, ERCP या नली की रिपोर्ट, brushing का नतीजा, खून की ताज़ा जाँचें और दवाओं की सूची साथ लाएँ।
★★★★★
“Met with Dr. Harsh Shah for the consultation of one of my relative. Dr. Harsh Shah is an exceptional surgical oncologist in Ahmedabad. His expertise in treating complex GI cancers like liver, pancreas, and colon cancers is truly remarkable. He explains everything clearly and gives patients full confidence in their treatment. Highly recommended for anyone looking for a skilled and compassionate cancer specialist.”
— Nagesh Patidar, Google review
★★★★★
“We are very thankful to Dr. Harsh Shah for successfully performing the Whipple’s procedure. From the beginning, he explained everything clearly and gave us great confidence throughout the treatment. Today, we are happy to share that we received the discharge and are going home with a positive feeling. Thank you, Dr. Harsh Shah, for your expertise, care, and support. Highly recommended for GI surgery.”
— Desai Sonal, Google review
★★★★★
“Dr harsh sir is a good doctor for Liver, Gastro & Cancer Surgeon in Ahmedabad thanks sir.”
— Milan Pareek, Google review
Reviews Google पर जैसे लिखे गए हैं, वैसे ही अंग्रेज़ी में रखे गए हैं। अभी किसी Google review में perihilar पित्त नली के cancer का नाम नहीं है। ये reviews Dr Harsh Shah की लिवर, अग्न्याशय और cancer surgery के बारे में हैं।
खर्च पित्त निकालने के इलाज, PVE की ज़रूरत, लिवर का कितना हिस्सा निकलता है और अस्पताल के दिनों पर निर्भर है। भर्ती से पहले लिखित अनुमान दिया जाता है।
Apollo Hospital, भाट, बड़ी बीमा कंपनियों और cashless सुविधा के साथ काम करता है। Pre-authorisation का काम बीमा विभाग सँभालता है। पित्त निकालना और PVE अलग भर्ती में भी हो सकते हैं, इसलिए हर एक का अनुमान अलग माँगें। भर्ती लंबी चले, तो उसी समय extension माँगा जाता है। भर्ती के समय scan की CD या pen drive, सारी रिपोर्टें, दवाएँ और उनकी खुराक, बीमा कार्ड और पहचान पत्र साथ लाएँ। Drain की देखभाल सीख सके, ऐसे परिवार के एक सदस्य को साथ लाएँ।
कुछ निकल सकती हैं। Tumour board देखता है कि रुकी हुई नलियाँ साफ़ किनारे के साथ निकलेंगी या नहीं, और बचा लिवर काफ़ी होगा या नहीं। शरीर की ताक़त भी देखी जाती है।
गाँठ साफ़ तौर पर निकलने लायक हो तो नहीं। Brushing साफ़ आए, तब भी cancer ख़ारिज नहीं होता। Chemotherapy से पहले टुकड़े की जाँच ज़रूरी है।
सिर्फ़ बचने वाली तरफ़ से पित्त निकाला जाता है। निकाली जाने वाली तरफ़ stent से infection का जोखिम बढ़ता है, ऑपरेशन को फ़ायदा नहीं।
Radiologist निकाली जाने वाली तरफ़ की portal vein बंद करते हैं। अगले हफ़्तों में दूसरी तरफ़ बढ़ती है, इसलिए ऑपरेशन के बाद ज़्यादा लिवर बचता है।
इसकी छोटी नलियाँ सीधे hilum में खुलती हैं, जहाँ गाँठ होती है। यह छूट जाए तो cancer छूट सकता है।
ज़्यादातर मरीज़ों को छह महीने capecitabine गोली की सलाह दी जाती है, आठ से बारह हफ़्ते में शुरू। फिर कम से कम पाँच साल जाँच चलती है।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre — Gota, Ahmedabad
Consultation, scan की समीक्षा, follow-up और नियमित जाँच।
Google: Dr Harsh Shah · 216 reviews में 4.89
Gota clinic का रास्ता · +91-63555-64601
Apollo Hospital — Bhat, Gandhinagar
Apollo Hospital International Limited, Plot No. 1 A, GIDC Bhat Industrial Estate, Bhat, Gandhinagar.
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 18 reviews में 4.94
Apollo, भाट का रास्ता · WhatsApp +91-63555-64601
पित्त नली के cancer के ऑपरेशन के लिए पूरे गुजरात से परिवार अहमदाबाद आते हैं, जैसे गांधीनगर, मेहसाणा, बनासकांठा, नडियाद, आणंद, भावनगर, राजकोट, जामनगर और कच्छ। दक्षिण राजस्थान और पश्चिम मध्य प्रदेश से भी आते हैं।
क्या आपको बताया गया है कि पित्त की नलियाँ जहाँ मिलती हैं, वहाँ गाँठ है? CT और MRCP की CD, stent या नली की रिपोर्ट और खून की ताज़ा जाँचें appointment से पहले भेजी जा सकती हैं, ताकि consultation शुरू होने तक वे पढ़ी जा चुकी हों। इलाज का फ़ैसला consultation में, जाँच के बाद ही होता है। फ़ोन करें +91-63555-64601 · रिपोर्ट WhatsApp पर पहले भेजें
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