Shah's Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre · अहमदाबाद & गांधीनगर
थैली — यही बात सबसे ज़्यादा डराती है, और यही सबसे कम समझाई जाती है। Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर · Gota OPD, अहमदाबाद.
मलाशय के बीच वाले हिस्से का cancer anterior resection से निकाला जाता है: जिस हिस्से में गाँठ है वह मलाशय, और उसके चारों ओर की चर्बी तथा lymph nodes की पूरी परत — सब एक साथ निकलते हैं, और ऊपर की आँत नीचे बचे मलाशय से जोड़ दी जाती है। यह जोड़ pelvis में गहराई में बैठता है, इसलिए कई मरीज़ों में अस्थायी ileostomy भी बनाई जाती है — छोटी आँत का एक लूप पेट की दीवार पर निकालकर कुछ महीनों के लिए थैली लगाई जाती है। इससे leak रुकता नहीं है; यह सिर्फ़ मल को जोड़ तक पहुँचने से रोकती है, ताकि leak हो भी जाए तो antibiotics और drain से सँभल जाए, emergency operation की नौबत न आए। बाद में adjuvant इलाज पूरा होने पर और contrast study में जोड़ भरा दिखने पर एक छोटे दूसरे operation से थैली बंद कर दी जाती है।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre. मलाशय के cancer का operation “बड़ा चीरा लगाकर की गई सामान्य सर्जरी” नहीं है। यहाँ dissection कुछ ही मिलीमीटर चौड़े plane में चलता है — एक तरफ़ गाँठ के lymph nodes वाली परत, दूसरी तरफ़ पेशाब और यौन क्रिया सँभालने वाली nerves, जिन्हें ढूँढ़कर बचाना पड़ता है; वे संयोग से नहीं बचतीं। Dr Harsh Shah का training surgical gastroenterology में super-speciality के तौर पर हुआ है — MS, फिर MCh और DrNB — और total mesorectal excision के साथ मलाशय का resection, open, laparoscopic या robotic, उनका रोज़ का काम है।
Clinic में जो surgeon आपको समझाता है, वही operation करता है और बाद में follow-up में भी देखता है — उस visit में भी, जिसमें थैली बंद करने की योजना बनती है।
मलाशय यानी बड़ी आँत का आख़िरी लगभग पंद्रह सेंटीमीटर। Surgeons इसे तीन भागों में बाँटते हैं, क्योंकि operation की मेज़ पर हर भाग अलग तरह से पेश आता है। बीच वाला हिस्सा peritoneal reflection के नीचे और मल पर काबू रखने वाली मांसपेशियों के ऊपर आता है — गाँठ गुदा से इतनी दूर कि sphincter आम तौर पर बचाया जा सके, और पेट की गुहा से इतनी नीचे कि पूरा operation तंग pelvis में गहराई में करना पड़े।
पूरी कहानी इसी भूगोल की है। गाँठ जितनी नीचे, जोड़ उतना नीचे; जोड़ जितना नीचे, अस्थायी ileostomy की संभावना उतनी ज़्यादा। इसीलिए “मुझे थैली लगेगी या नहीं?” का पहला ईमानदार जवाब है — पहले MRI पढ़ना पड़ेगा।
ऊपरी हिस्से की गाँठ में अक्सर partial mesorectal excision होता है। बीच वाले हिस्से की, ख़ासकर निचले सिरे की गाँठ में पूरा mesorectum pelvic floor तक निकालना पड़ता है — जोड़ और गहरा बैठता है और diversion की चर्चा बदल जाती है। पूरी तस्वीर मलाशय के cancer के इलाज के पन्ने पर है।
मलाशय का cancer MRI पर चलने वाली बीमारी है। Operation के बारे में, radiotherapy के बारे में या थैली के बारे में — कोई भी फ़ैसला pelvic MRI की ढंग की report आए बिना नहीं लिया जाना चाहिए।
इस scan से कुछ तय सवालों के जवाब चाहिए, और जो report वे जवाब न दे उसे वापस भेजा जाता है। गाँठ दीवार में कितनी गहराई तक उतरी है। वह mesorectal fascia — जो परत निकालनी है उसकी बाहरी त्वचा — से कितनी पास है, क्योंकि उस रेखा को छूती गाँठ पूरा plan बदल देती है। नसों के भीतर गाँठ है या नहीं। कौन से lymph nodes प्रभावित लगते हैं। और गाँठ का निचला किनारा गुदा से कितना ऊपर है।
MRI के साथ: caecum तक पहुँची colonoscopy और biopsy, ताकि ऊपर दूसरी गाँठ हो तो operation की योजना बनने के बाद पता न चले; छाती, पेट और pelvis का CT; baseline CEA; और पोषण, diabetes तथा anaesthesia की fitness। फिर हर case इलाज से पहले multidisciplinary meeting में जाता है — यहाँ यह नियम बड़ी आँत के cancer से ज़्यादा सख़्त है, क्योंकि इलाज का क्रम उसी कमरे में तय होता है।
एक क़दम operation वाले दिन नहीं, पहले ही होना चाहिए। थैली की ज़रा भी संभावना हो तो stoma nurse मरीज़ को बिठाकर, खड़ा करके और लिटाकर पेट पर निशान लगाती है। सिलवट में या बेल्ट के नीचे लगी थैली रोज़ की मुसीबत बन जाती है — और यह टाली जा सकती है।
मलाशय के cancer की सर्जरी का बुनियादी सिद्धांत total mesorectal excision है। मलाशय और उसके चारों ओर की चर्बी की परत को pelvis की दीवार से एक क़ुदरती, लगभग ख़ून-रहित plane में अलग करके पूरा अखंड निकाला जाता है। निकले हिस्से की गुणवत्ता — परत फटी न हो, margin साफ़ हो, गाँठ के नीचे पर्याप्त लंबाई हो — यही pathologist जाँचता है, और आगे क्या होगा इस बारे में यह surgeon के बाक़ी किसी भी काम से ज़्यादा बताता है।
Operation open, laparoscopic या robotic — किसी भी तरह हो सकता है। तंग पुरुष pelvis में गहराई में robotic platform का असली फ़ायदा है: wristed instruments और स्थिर camera से निचला dissection ज़्यादा क़ाबू में रहता है। लेकिन पैमाना चीरे की लंबाई नहीं, निकला हुआ हिस्सा है — और plane हाथ से छूटता लगे तो बिना झिझक open में convert करना सही फ़ैसला है, नाकामी नहीं। अगर पहले radiotherapy दी गई हो तो operation उसके ख़त्म होने के कुछ हफ़्ते बाद रखा जाता है, क्योंकि ताज़ी सिंकी pelvis में जोड़ और घाव दोनों कम भरोसेमंद रहते हैं।
आख़िर में आँत बचे हुए मलाशय से जोड़ दी जाती है। वह जोड़ मेज़ पर ही जाँचा जाता है — हवा से, या flexible scope डालकर आँखों से देखकर — और pelvis में आम तौर पर एक drain रखा जाता है, जो नीचे वाले जोड़ के बाद का नियम है, भले ही बड़ी आँत के operation के बाद यह नियम न हो।
Defunctioning ileostomy leak नहीं रोकती। वह भयानक leak को सँभाली जा सकने वाली leak में बदल देती है। पूरा कारण इसी एक वाक्य में है — और मरीज़ को अक्सर यही वाक्य नहीं बताया जाता।
Pelvis में गहराई में बैठा जोड़ पेट की सर्जरी का सबसे कठिन जोड़ है। वह नीचे होता है, ऊपर वाले जोड़ जितनी ख़ून की सप्लाई उसे नहीं मिलती, और उस पर radiotherapy भी हो चुकी हो सकती है। मल उसके ऊपर से गुज़रते हुए वह leak हो जाए तो पूरी pelvis दूषित होती है और बात अक्सर emergency operation और स्थायी थैली तक पहुँचती है। पर ileostomy मल को पहले ही मोड़ चुकी हो, तो वही leak कई बार antibiotics और drain से सँभल जाती है और जोड़ नीचे-नीचे भरता रहता है।
तो ileostomy इसलिए नहीं बनती कि surgeon को अपने जोड़ पर भरोसा नहीं। वह इसलिए बनती है कि leak हो जाए तो क़ीमत क्या चुकानी पड़ेगी। Diversion की तरफ़ धकेलने वाले कारण वही हैं जो leak को ज़्यादा संभावित या ख़तरनाक बनाते हैं: बहुत नीचे बैठा जोड़, पहले दी गई radiotherapy, तंग पुरुष pelvis, कमज़ोर पोषण, diabetes, steroids, तंबाकू-सिगरेट, emergency operation। बीच वाले हिस्से की गाँठ में जोड़ ऊँचा बैठे, पोषण अच्छा हो और radiotherapy न हुई हो, तो बिना थैली के भी वाजिब तरीक़े से हो सकता है।
ईमानदार बात यह है कि यह फ़ैसला पेट खुलने के बाद, ऊपर की सारी बातें देखकर लिया जाता है — और आपसे पहले ही “संभावना” के तौर पर चर्चा किया जाता है, “वादे” के तौर पर नहीं। Pelvis देखे बिना जो इस सवाल का आख़िरी जवाब दे दे, वह अधूरी जानकारी पर जवाब दे रहा है।
यह असल में है क्या: छोटी आँत का एक लूप निशान लगी जगह से पेट की दीवार के बाहर निकालकर, खोलकर त्वचा से सिल दिया जाता है — ताकि मल जोड़ तक पहुँचे बिना थैली में निकल जाए। आँत काटकर अलग नहीं की जाती, इसीलिए बाद में उसे बंद करने का operation छोटा रह जाता है। यह मल colon से नहीं गुज़रा होता, इसलिए पतला और ज़्यादा बार आता है — घबराने की नहीं, पानी और नमक का ध्यान रखने की बात है।
Hospital में recovery फिर पेट से नहीं, थैली से तय होती है। Catheter जल्दी निकलता है, खाना जल्दी शुरू होता है, पहले दिन से चलना शुरू, और drain साफ़ आने पर निकल जाता है। Discharge की तारीख़ असल में stoma independence तय करता है — मरीज़ या घर का कोई ख़ुद थैली बदल पाता है या नहीं। इसीलिए सिखाना अगले दिन से ही शुरू होता है।
थैली बंद करने की योजना दो शर्तें पूरी होने पर ही बनती है। पहली — adjuvant chemotherapy सुझाई गई थी तो वह पूरी हो चुकी हो। दूसरी — contrast study में जोड़ देखकर साबित हो कि वह अखंड है, कहीं leak नहीं और सिकुड़ा भी नहीं। व्यवहार में थैली पहले operation के कुछ महीने बाद बंद होती है, और समय बीच का इलाज तय करता है, कैलेंडर नहीं।
Operation ख़ुद पहले की तुलना में छोटा है: थैली के चारों ओर चीरा, लूप छुड़ाकर छेद बंद करना या थोड़ा हिस्सा निकालकर दोबारा जोड़ना, और पेट की दीवार सिलना। आम तौर पर छोटा admission — फिर भी असली operation, अपने जोखिमों के साथ: घाव में infection, आँत का धीरे चालू होना, कभी चिपकने से रुकावट।
पहले operation से पहले ही दो बातें साफ़ कही जानी चाहिए, क्योंकि यही दो बातें सबसे ज़्यादा हल्का करके बताई जाती हैं। हर अस्थायी ileostomy बंद नहीं होती। जोड़ leak होकर ख़राब भरा हो, सिकुड़ गया हो, बीमारी लौट आई हो, या मरीज़ की हालत दूसरा operation झेलने लायक़ न हो — तो थैली रह जाती है। “अस्थायी” कही गई कुछ थैलियाँ स्थायी बन जाती हैं, और यह बात consent देने से पहले सुनने का हर मरीज़ को हक़ है — बाद में पता चले, यह नहीं चलेगा।
दूसरी बात यह कि थैली बंद होने के बाद शौच कैसा रहेगा। अब मल ऐसे मलाशय से गुज़रता है जो पहले से छोटा और कम लचीला है — इसलिए कई लोगों को तुरंत और बार-बार जाना पड़ता है, एक साथ चार-पाँच बार जाकर फिर घंटों कुछ नहीं, गैस और मल का फ़र्क़ समझ नहीं आता, कभी कपड़े भी ख़राब होते हैं। इसका नाम है low anterior resection syndrome — बिगड़ने की निशानी नहीं, अपेक्षित है। एक-दो साल में यह काफ़ी सुधरता है, और bowel retraining, loperamide, pelvic floor physiotherapy तथा ज़रूरत पड़ने पर transanal irrigation से सचमुच फ़र्क़ पड़ता है। यह बात consent से पहले होनी चाहिए।
जो surgeon इन सवालों का स्वागत करे, उसी के पास जाएँ। जवाब में आँकड़ा आए तो पूछिए कि वह published औसत है या इस team का — और आपके लिए उसका मतलब क्या। व्यक्तिगत जोखिम हमेशा आमने-सामने बताया जाता है, website पर नहीं।
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“We came from Mp Indore for the treatment of Rectal cancer and Robotic surgery was done by Dr harsh shah....After surgery my son is good now. Heartly thankful to you sir...”
— Parasram Solanki, Google review
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“We came from Udaipur, Rajasthan for my husband's rectal cancer surgery. Dr. Harsh Shah performed the operation with great expertise and care. He explained everything clearly and supported us throughout the treatment. The surgery was successful, and we are very grateful for the excellent care we received. Dr. Harsh Shah is one of the best rectal cancer surgeons. Highly recommended!”
— Bhupendar Dave, Google review
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“I would like thanks Dr harsh shah operated my wife for rectal cancer . We discharged today. And she is good now. Thank u so much sir for everything. Best GI and Rectal cancer surgeon in ahmedabad.”
— Bajrang Singh, Google review
Google पर जो लिखा गया है, वही ज्यों का त्यों — वर्तनी और जगह सहित — यहाँ रखा गया है।
निकला हुआ हिस्सा pathologist के पास जाता है, और जो report आती है वह पूरी बीमारी का सबसे अहम काग़ज़ है। उसमें लिखा होता है कि mesorectal परत कितनी अखंड थी, margin साफ़ है या नहीं, गाँठ कितनी गहराई तक उतरी थी, कितने lymph nodes जाँचे गए और कितनों में गाँठ थी, और नसों में गाँठ थी या नहीं। पहले radiotherapy हुई हो तो गाँठ ने कितना जवाब दिया, वह भी।
यह report लगभग दो हफ़्ते पर आपके साथ बैठकर देखी जाती है — साथ में घाव की जाँच, stoma की समीक्षा और ज़रूरत हो तो dietitian। इसी से तय होता है कि operation के बाद chemotherapy देनी है या नहीं, और आगे का पूरा कार्यक्रम बनता है।
उसके बाद का follow-up नियोजित होता है: लक्षण, जाँच, वज़न और CEA शुरुआती सालों में हर कुछ महीने पर, तय समय पर scans, और समय पर colonoscopy। थैली बंद होने के बाद हर visit में शौच, पेशाब और यौन क्रिया के बारे में ख़ुद पूछा जाता है — मरीज़ यह बात अपने आप शायद ही कहते हैं।
मलाशय के cancer का anterior resection ज़्यादातर health insurance policies और CGHS में शामिल है, और admission नियोजित होता है — इसलिए काग़ज़ी काम पहले से ठीक से हो सकता है। Office pre-authorisation तैयार करके insurer से पूरा कराता है।
थैली बंद करने का operation अलग admission और अलग claim है। इसके बारे में insurer से पहले operation के समय ही पूछ लें, महीनों बाद नहीं। एक ही बीमारी में नियोजित दूसरे procedure को हर policy अलग तरह से गिनती है, और जल्दी जान लेने से बाद का कड़वा अनुभव टल जाता है।
आख़िरी आँकड़ा approach, रुकने के दिन, पहले radiotherapy हुई या नहीं, और room की श्रेणी पर बदलता है। Admission से पहले लिखित estimate दिया जाता है।
ज़रूरी नहीं। बीच वाले हिस्से की गाँठ में यह इस पर निर्भर है कि जोड़ कितना नीचे बैठता है, पहले radiotherapy हुई थी या नहीं, और आपकी कुल सेहत कैसी है। Operation से पहले संभावना के तौर पर चर्चा होती है और आख़िरी फ़ैसला theatre में लिया जाता है।
Defunctioning ileostomy अस्थायी मानकर ही बनाई जाती है और दूसरे operation से बंद होती है। पर ईमानदार बात यह है कि हर एक बंद नहीं होती — जोड़ ख़राब भरा हो, सिकुड़ गया हो या हालात बदल गए हों तो रह भी जाती है।
आम तौर पर कुछ महीने। समय chemotherapy की ज़रूरत और contrast study तय करते हैं — कोई निश्चित तारीख़ नहीं।
हाँ, ख़ासकर radiotherapy या थैली के फ़ैसले से पहले। सही second opinion के लिए सिर्फ़ report नहीं, MRI की images चाहिए।
Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre — Gota, अहमदाबाद
Consultation, colonoscopy-biopsy-MRI reports की समीक्षा, second opinion, stoma और follow-up।
Google: Dr Harsh Shah · 4.89 from 216 reviews
Gota clinic का रास्ता
Apollo Hospital — Bhat, गांधीनगर
Admission, operation और भर्ती रहकर इलाज — थैली बंद करने का operation भी।
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 4.94 from 17 reviews
Apollo, Bhat का रास्ता
मलाशय के cancer के operation के लिए गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से मरीज़ आते हैं। बाहर से आ रहे हों तो reports पहले भेज दें, ताकि पहली मुलाक़ात फ़ैसले की बने।
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