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छोटी आंत में रुकावट और गांठ: operation कब?

Shah's Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre · अहमदाबाद और गांधीनगर

महीनों के दर्द से लेकर उस फ़ैसले तक, जिसमें आंत का टुकड़ा निकालना तय होता है — और उससे पहले क्या साबित होना चाहिए। Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर · Gota OPD, अहमदाबाद.

छोटी आंत की गांठ अकसर तब पकड़ में आती है जब आंत में रुकावट आ चुकी होती है — और कई मरीज़ों में पहली बार पता emergency operation की मेज़ पर ही चलता है। लेकिन भारत में छोटी आंत की गांठ या सिकुड़न का सबसे आम कारण cancer नहीं है। सबसे आम कारण है intestinal tuberculosis, और उसके बाद lymphoma। दोनों का इलाज दवा से होता है, operation से नहीं। इसलिए सबसे ज़रूरी सवाल यह नहीं कि operation कैसे होगा — सवाल यह है कि आंत निकालने का फ़ैसला किस आधार पर लिया जा रहा है।

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Operation कौन करता है, और कहाँ

Dr Harsh Shah, gastrointestinal and cancer surgeon, Ahmedabad
Dr Harsh Shah — MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology).

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre. Surgical gastroenterology की super-specialty training — यानी general surgery करके पेट के operation में रुचि रखना नहीं, बल्कि पाचनतंत्र ही जिसका पूरा विषय है, ऐसी तालीम। छोटी आंत मुश्किल जगह है: लंबी, हिलती-डुलती, scope से पहुँचना कठिन, और उसमें होने वाली गांठें इतनी कम मिलती हैं कि ज़्यादातर surgeon को कभी-कभार ही मिलती हैं। इसी वजह से यहाँ diagnosis में जल्दबाज़ी ठीक नहीं।

Dr Harsh Shah
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
Small Bowel Cancer Surgeon · Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर · Gota OPD, अहमदाबाद

Gota clinic पर Google rating 4.89, 216 reviews में से; Apollo, Bhat पर 4.94, 17 reviews में से।

Gota OPD में जो surgeon आपका scan देखता है, वही surgeon Apollo, Bhat में operation करता है। छोटी आंत की हर गांठ पहले tumour board में रखी जाती है — surgeon, medical oncologist, radiation oncologist, radiologist और pathologist एक साथ — और यहाँ board होने की एक ख़ास वजह है: यह cancer दुर्लभ है, पर इससे मिलती-जुलती बीमारियाँ आम हैं।

देर से पता क्यों चलता है, जल्दी कैसे?

छोटी आंत की गांठ देर से पकड़ी जाती है क्योंकि लक्षण बहुत साधारण होते हैं: महीनों से आता-जाता मरोड़ वाला दर्द, बिना वजह की कमज़ोरी और anaemia, और अंत में आंत की रुकावट। यही वजह है कि बहुत से मरीज़ों का पहला निदान रुकावट के emergency operation में ही होता है।

एक पैटर्न है जो यह देरी घटा देता है, और वही सबसे ज़्यादा छूटता है। जिस मरीज़ को iron-deficiency anaemia हो, या शौच में ख़ून जा रहा हो, और जिसकी gastroscopy और colonoscopy दोनों normal आ चुकी हों — उसे वही दो जाँचें तीसरी बार दोहराने की ज़रूरत नहीं है। उसे छोटी आंत दिखवाने की ज़रूरत है। यही वह हिस्सा है जहाँ इन दोनों में से कोई scope पहुँचता ही नहीं, और जवाब वहीं छिपा होता है।

सही जाँच है CT enterography या MR enterography — यानी छोटी आंत को जान-बूझकर फुलाकर लिया गया scan, जो सादे CT abdomen से अलग जाँच है। गांठ पहुँच में हो तो balloon enteroscopy से tissue लिया जा सकता है और surgeon के लिए जगह पर निशान भी लगाया जा सकता है।

Capsule endoscopy छिपे ख़ून के लिए उपयोगी है, पर तभी जब scan पर सिकुड़न पहले ही बाहर की जा चुकी हो। सिकुड़न में capsule फँस जाए तो वह दूसरी मुसीबत बन जाती है — और वह टाली जा सकती थी।

गांठ दिखने का मतलब cancer नहीं होता

भारत में छोटी आंत की सिकुड़न या गांठ का सबसे आम कारण intestinal tuberculosis है। दूसरा lymphoma। इन दोनों में आंत निकालने की ज़रूरत नहीं होती। TB पूरा कोर्स दवा लेने से ठीक होता है, और lymphoma का इलाज haemato-oncologist chemotherapy से करते हैं। इनमें से किसी के लिए किया गया operation स्वस्थ आंत का टुकड़ा निकाल देता है और बीमारी का इलाज कुछ नहीं करता।

यह किताबी चेतावनी नहीं है। Gota OPD में ऐसे मरीज़ आते हैं जिनका operation कहीं और तय भी हो चुका होता है, और हाथ में सिर्फ़ इतना CT report होता है — “small bowel mass, likely malignant”। Scan इन्हें भरोसे से अलग नहीं कर सकता: mesentery में necrotic lymph nodes TB की ओर इशारा करते हैं, और बड़े nodes के साथ आंत सिकुड़ने के बजाय फैली हुई हो, मरीज़ को बुख़ार और रात में पसीना हो, तो lymphoma की ओर। पर इशारा सबूत नहीं है — और यहाँ फ़र्क़ गोली खाने और आंत का टुकड़ा गँवाने के बीच का है।

Crohn disease भी बिल्कुल यही तस्वीर बनाती है, और लंबे समय तक ली गई दर्द की दवाएँ भी। इन सबका इलाज दवा से होता है। छोटी आंत के cancer जैसी दिखने वाली बीमारियों की सूची, ख़ुद छोटी आंत के cancer की सूची से लंबी है।

आंत निकालने से पहले क्या तय होता है?

जहाँ हालत इजाज़त दे, वहाँ तीन चीज़ें। Tissue — और वह tissue histology के साथ-साथ TB panel के लिए भी। छाती, पेट और pelvis के staging scan। और tumour board का फ़ैसला। मरीज़ स्थिर हो, तो इनमें से कोई भी जल्दबाज़ी में नहीं छोड़ी जाती।

इस पूरे पन्ने की सबसे अहम बात TB panel है। सिर्फ़ histopathologist को भेजी गई biopsy आधा ही जवाब देती है। वही tissue AFB stain के लिए, GeneXpert जैसी molecular जाँच के लिए और mycobacterial culture के लिए भी जाना चाहिए। ये सब tissue लेते समय ही लिखवाने पड़ते हैं, क्योंकि वह tissue एक ही बार मिलता है।

उसी specimen पर mismatch repair की जाँच भी होती है। इससे पता चलता है कि परिवार में Lynch syndrome चल रहा है या नहीं, और आगे बढ़े हुए रोग में वे मरीज़ पहचाने जाते हैं जिन पर immunotherapy बहुत अच्छा असर करती है। यह चुने हुए मरीज़ों में नहीं, सबमें की जाती है।

आख़िरी बात — नीचे कोई और बीमारी तो नहीं, यह जान-बूझकर खोजा जाता है: Crohn disease, coeliac disease, या Lynch, familial adenomatous polyposis और Peutz-Jeghers जैसे वंशानुगत syndrome। इनमें से कोई मिले तो operation और बाद की निगरानी दोनों बदल जाती हैं, और एक मरीज़ का निदान पूरे परिवार का मामला बन जाता है — genetics referral होता है और रिश्तेदारों को भी जाँच की सलाह दी जाती है।

कौन-सा operation: छोटा टुकड़ा या दाहिनी आंत?

निदान सचमुच cancer का हो, तो operation ही इकलौता इलाज है जो ठीक करता है। जिस हिस्से में गांठ है, आंत का वह टुकड़ा — उसके lymph nodes वाली पंखे जैसी झिल्ली समेत — निकाल दिया जाता है और दोनों सिरे जोड़ दिए जाते हैं। Ileum के आख़िरी हिस्से की गांठ, जहाँ छोटी आंत बड़ी आंत से मिलती है, वहाँ दाईं ओर का colon भी साथ निकालना पड़ता है — इसलिए नहीं कि colon में बीमारी है, बल्कि इसलिए कि lymph nodes ठीक से निकालने का दूसरा रास्ता नहीं।

गांठ चाहे जो हो, हर operation में दो काम होते हैं। पूरी छोटी आंत एक सिरे से दूसरे सिरे तक उँगलियों से टटोली जाती है, क्योंकि कहीं और दूसरी गांठ होना असामान्य नहीं — ख़ासकर वंशानुगत syndrome और neuroendocrine tumour में। और कितनी आंत निकली तथा कितनी बची, यह नापकर operation note में लिखा जाता है। आगे कभी दूसरा operation करना पड़े तो यह आँकड़ा ज़िंदगी भर काम आता है।

Lymph nodes को गौण नहीं माना जाता: specimen से कम nodes निकलें तो मरीज़ का staging अधूरा रह जाता है, और फिर chemotherapy देनी है या नहीं, यह फ़ैसला अधूरी जानकारी पर होता है। और गांठ अगर बग़ल की किसी रचना से चिपकी हो, तो उसे छुड़ाने के बजाय एक ही टुकड़े में साथ निकाला जाता है — छुड़ाने में ठीक उसी जगह बीमारी छूट जाने का ख़तरा है जहाँ वह सबसे ज़्यादा मायने रखती है।

किस तरीक़े से। नियोजित operation ज़्यादातर laparoscopic होते हैं। कुछ open करना बेहतर होता है, और laparoscopic शुरू किया गया operation अगर दिखाई या plane ठीक न लगे तो open में बदल दिया जाता है। यह फ़ैसला operation के दौरान, जो मिलता है उस पर लिया जाता है। छोटी आंत का resection ऐसा operation नहीं जिसे पहले से robotic कहकर वादा किया जा सके — और जो पन्ना ऐसा वादा करे, वह operation नहीं, मशीन बेच रहा है।

जब हालत emergency हो। आंत पूरी बंद हो जाए या perforation हो जाए तो operation तुरंत करना पड़ता है। तब भी tissue लिया जाता है और TB की जाँच समेत पूरा panel भेजा जाता है — emergency में भी यह एक चीज़ नहीं छोड़ी जाती। मरीज़ स्थिर और पोषण में ठीक हो तो आंत जोड़ दी जाती है; पेट में संक्रमण फैला हो, मरीज़ septic या बहुत कमज़ोर हो तो उसकी जगह stoma बनाया जाता है, क्योंकि ऐसी हालत में लगाया गया जोड़ ही leak करता है। और अगर बीमारी अनपेक्षित रूप से फैली हुई मिले, तो सही operation छोटा है: biopsy लीजिए, रुकावट खोलिए, रुक जाइए।

Histology report पूरी योजना बदल सकती है

किसी भी दूसरे operation से ज़्यादा यहाँ — operation पूरा होने के बाद भी निदान बदल सकता है। निकाली गई आंत की पूरी जाँच होती है, और वह cancer के बजाय tuberculosis, lymphoma या Crohn disease निकल सकती है। इन तीनों का इलाज दवा से होता है, इसलिए report पूरी योजना बदल देती है — और यह बात consent लेने से पहले बताई जाती है, बाद में नहीं।

जवाब TB आए तो anti-tubercular treatment का पूरा कोर्स शुरू होता है और पूरा किया जाता है — भले ही बीमारी वाला हिस्सा निकल चुका हो, क्योंकि संक्रमण सिर्फ़ उसी टुकड़े तक सीमित नहीं था। जवाब lymphoma आए तो मरीज़ haemato-oncologist के पास जाता है और आगे कोई operation नहीं किया जाता। और जवाब cancer आए तथा lymph nodes में बीमारी हो, तो बाद में chemotherapy की सलाह दी जाती है।

एक चेतावनी यहाँ ज़रूरी है क्योंकि उसका सीधा असर इलाज पर पड़ता है। छोटी आंत के cancer का इलाज अकसर colon cancer की तरह किया जाता है, क्योंकि microscope के नीचे दोनों एक जैसे दिखते हैं। पर वे एक ही बीमारी नहीं हैं, और इसी धारणा पर अपनाई गई दवाओं का एक वर्ग साफ़ फ़ायदा नहीं दिखा सका और अब उससे दूरी बनाई जा रही है। यहाँ इलाज इसी cancer के सबूतों पर चुना जाता है, किसी आम cancer से तुलना करके नहीं।

Ileum निकले तो बाद में क्या बदलता है?

Recovery enhanced-recovery तरीक़े से होती है: उसी शाम बिस्तर से उठना, जल्दी तरल लेना, अगले दिन खाना, और नियोजित operation हो तो हफ़्ते के भीतर घर। Ileum का आख़िरी हिस्सा निकला हो तो दो चीज़ें अलग होती हैं — पतले दस्त, जिनका इलाज है, और vitamin B12, जो अब खाने से शरीर में नहीं चढ़ता।

इस operation के लिए आने वाले ज़्यादातर मरीज़ पहले से ही कमज़ोर होते हैं, क्योंकि महीनों से खाने पर दर्द होने की वजह से खाना कम कर दिया होता है। नियोजित operation में पोषण और anaemia operation से पहले सुधारे जाते हैं, बाद में नहीं — recovery कैसी जाएगी, यह बदलने वाली गिनी-चुनी चीज़ों में से एक यही है। और stoma की संभावना हो तो theatre जाने से पहले पेट पर उसकी जगह निशान लगा दी जाती है।

Ileal resection के बाद पतले दस्त bile salts के colon तक पहुँचने से होते हैं, और एक साधारण दवा से क़ाबू में आते हैं। Vitamin B12 जाँचा जाता है और फिर जीवन भर injection से दिया जाता है, लिखे हुए schedule पर। Iron और वज़न पर नज़र रखी जाती है, और बची हुई आंत की लंबाई record में आगे ले जाई जाती है।

एक मरीज़ के परिवार ने क्या कहा

★★★★★

“हम डॉ. हर्ष शाह उनकी कॉर्डिनेटर रोशनी मेम और अपोलो हॉस्पिटल की पूरी टीम का रहे दिल से आभारी रहेंगे.. मेरी वाइफ के अपेंडिक्स ऑपरेशन के बाद पता चले न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान उन्होंने न केवल बेहतरीन सर्जिकल कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि मुझे और मेरे परिवार को पूरी बीमारी ओर प्रक्रिया के बारे में सही ओर आसान भाषा में समझाइश भी दी..उन्होंने हमारे हर सवाल का धैर्य से जवाब दिया और मुझे आश्वस्त महसूस कराया कि मेरी वाइफ एक सुरक्षित हाथों में है। उनके मार्गदर्शन और देखभाल में मेरी वाइफ का ट्यूमर पूरी तरह निकाला जा चुका है, यदि आपको गैस्ट्रो ऑन्कोलॉजिस्ट सर्जन की आवश्यकता है, तो डॉ. हर्ष शाह और अपोलो हॉस्पिटल गांधीनगर गुजरात बहुत बेहतरीन ऑप्शन साबित होंगे..।”

Google review, जैसा लिखा गया वैसा ही। इसमें appendix के operation के बाद मिले neuroendocrine tumour की बात है — छोटी आंत के आख़िरी सिरे की गांठ जिन रास्तों से सामने आती है, उनमें से एक।

Consent से पहले क्या पूछें, second opinion कब?

नियोजित small bowel resection से पहले सबसे काम का एक ही सवाल है: TB बाहर किया गया है या नहीं, और tissue histology के अलावा TB की जाँचों के लिए भी भेजा गया था या नहीं? अगर जवाब यह हो कि tissue लिया ही नहीं गया और योजना “निकालकर देखेंगे” की है — तो ठीक वही पल second opinion माँगने का है।

OPD में पूछने लायक़, और लिख लेने लायक़:

  • अभी कौन-सा निदान मान कर चला जा रहा है, और और क्या हो सकता है?
  • Tissue लिया गया है? और वह AFB, GeneXpert और culture के लिए भी गया था?
  • यह केस tumour board में रखा गया? Board का क्या निष्कर्ष था?
  • कितनी आंत निकलेगी, और कितनी बचेगी?
  • आंत जोड़ी जाएगी, या stoma की संभावना है — और है तो जगह निशान की गई?
  • Operation असल में कौन करेगा?
  • Report में TB या lymphoma निकले तो आगे क्या?
  • Mismatch repair की जाँच होगी? परिवार में किसी की जाँच करानी होगी?

इलाज शुरू होने से पहले किसी भी समय second opinion लेना वाजिब है, और दो हालात में सबसे काम का: जब tissue लिए बिना resection तय हो, और जब कहीं और emergency operation हो चुका हो पर histology में cancer के बजाय कुछ और निकला हो। सिर्फ़ report नहीं, images लेकर आइए; biopsy के blocks या slides लिए गए हों तो वे भी लाइए; और जाँच होगी, यह उम्मीद रखिए।

आपके इलाज का क्रम, पाँच क़दमों में

  1. Consultation तय कीजिए। CT या MR enterography, endoscopy की report और biopsy का नतीजा पहले से WhatsApp पर भेजिए। Consultation Gota OPD, अहमदाबाद में होती है।
  2. निदान तक पहुँचना। जाँच, सही scan अगर न हुआ हो तो वह, गांठ पहुँच में हो तो tissue के लिए enteroscopy, उस tissue पर TB panel, staging scan और tumour board की चर्चा।
  3. योजना, लिखकर। अभी निदान क्या है, कौन-सा operation तय है, कितनी आंत शामिल है, stoma की संभावना है या नहीं, और क्या बदले तो योजना बदलेगी — यह सब आपको बताया जाता है।
  4. Operation और अस्पताल में रुकना। Apollo Hospital, Bhat, गांधीनगर में भर्ती और operation, एक ही तय consultant team के साथ। नियोजित operation में पहले पोषण सुधारा जाता है, उसी शाम उठना, और खाना-चलना शुरू होते ही छुट्टी।
  5. Report, और उसके बाद। TB और mismatch repair के नतीजों समेत histology आपके साथ देखी जाती है, nodes में बीमारी हो तो chemotherapy के लिए referral, ileal resection के बाद B12 और पोषण का follow-up, syndrome का शक हो तो genetics referral, और लिखी हुई surveillance योजना।

ख़र्च, insurance और भर्ती

Small bowel resection का कोई एक दाम नहीं होता। यह room category, कितने दिन रुकना पड़ा, operation laparoscopic या open, नियोजित या emergency, intensive care की ज़रूरत पड़ी या नहीं, और stoma बना या नहीं — इन सब पर निर्भर करता है। नियोजित भर्ती से पहले लिखित estimate दिया जाता है, और उसमें क्या शामिल है और क्या नहीं, यह office साफ़ बताता है।

Apollo Hospital, Bhat बड़े insurers और cashless schemes से जुड़ा है, और pre-authorisation office ही सँभालता है। Report के साथ policy का विवरण भी भेजिए ताकि काग़ज़ी काम और medical योजना साथ-साथ चलें। Stoma बना हो और बाद में बंद करना हो, तो वह दूसरा operation अलग भर्ती है और उसका बजट शुरू से जोड़ लेना ठीक रहता है।

भर्ती के समय लाइए: disc या drive पर सारे scan, पिछले discharge summary और operation note, biopsy report और slides, दवाओं की सूची मात्रा सहित, insurance card और पहचान पत्र, और संपर्क के लिए एक परिजन।

अकसर पूछे जाने वाले सवाल

CT में छोटी आंत में mass लिखा है। इसका मतलब cancer ही है?

अकेले इससे नहीं, और भारत में तो अकसर नहीं। TB और lymphoma दोनों ऐसी ही तस्वीर बनाते हैं और दोनों का इलाज दवा से होता है। Scan सवाल खड़ा करता है; जवाब tissue देता है।

Biopsy के बिना सीधे operation नहीं हो सकता?

कभी-कभी चारा नहीं होता — न खुलने वाली रुकावट का operation करना ही पड़ता है, और निदान बाद में specimen से होता है। पर मरीज़ स्थिर हो तब "निकालकर देख लेते हैं" का मतलब है यह ख़तरा उठाना कि जो बीमारी गोली से ठीक हो जाती, उसके लिए आंत निकल जाए।

मेरी gastroscopy और colonoscopy में बार-बार कुछ क्यों नहीं मिलता?

क्योंकि इन दोनों में से कोई छोटी आंत तक पहुँचता ही नहीं। आमाशय और बड़ी आंत के बीच एक लंबा हिस्सा है जिसे ये scope नहीं देख पाते। वहाँ तीसरी बार वही जाँच नहीं, CT या MR enterography — या enteroscopy — चाहिए।

क्या stoma लगाना पड़ेगा?

नियोजित operation में आम तौर पर नहीं — आंत जोड़ दी जाती है। Stoma की संभावना तब बढ़ती है जब operation emergency हो और पेट में संक्रमण फैला हो, या मरीज़ septic या बहुत कमज़ोर हो — क्योंकि ऐसी हालत में लगाया गया जोड़ ही नाकाम होता है।

क्या यह operation robotic तरीक़े से होता है?

आम तौर पर laparoscopic, कभी open। तरीक़ा मरीज़ और operation में जो मिलता है उस पर चुना जाता है, और जहाँ open ज़्यादा सुरक्षित हो वहाँ operation बदल दिया जाता है। इस operation के लिए surgeon मशीन देखकर नहीं चुना जाता।

Operation के बाद report में TB आया। अब भी दवा लेनी होगी?

हाँ। बीमारी वाला हिस्सा निकल चुका हो तब भी anti-tubercular treatment का पूरा कोर्स पूरा किया जाता है, क्योंकि संक्रमण सिर्फ़ निकाले गए टुकड़े तक सीमित नहीं था। घर के संपर्क में रहने वालों की भी जाँच कराई जाती है।

Dr Harsh Shah कहाँ मिलते हैं

Shah’s Gastro, Cancer & Robotic Surgery Centre — Gota, अहमदाबाद
Consultation, जाँच, report देखना, follow-up और surveillance.
Google: Dr Harsh Shah · 4.89, 216 reviews
Gota clinic का रास्ता

Apollo Hospital — Bhat, गांधीनगर
भर्ती, operation और अस्पताल में देखभाल.
Google: Dr Harsh Shah – Robotic GI Surgeon · 4.94, 17 reviews
Apollo, Bhat का रास्ता

छोटी आंत के operation के लिए मरीज़ पूरे गुजरात से अहमदाबाद आते हैं — गांधीनगर, मेहसाणा, नडियाद, आणंद, बनासकांठा, भावनगर, राजकोट, जामनगर और कच्छ — और दक्षिण राजस्थान तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश से भी। Scan पहले से WhatsApp पर भेजिए।

Dr Harsh Shah के पाचनतंत्र के cancer के काम के बारे में और: cancer surgery services · colon cancer treatment · stomach cancer treatment.

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