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मलाशय के कैंसर की सर्जरी: क़दम दर क़दम

अंतिम अपडेट: 05-Nov-2026

मलाशय के कैंसर की सर्जरी होनी है और जानना चाहते हैं कि हर चरण में क्या होगा? डॉ. हर्ष शाह की टीम को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजिए। · फ़ोन करें +91-63555-64601

डॉ. हर्ष शाह का चित्र, पेट और कैंसर सर्जन, अहमदाबाद

डॉ. हर्ष शाह
MS, MCh (Surgical Gastroenterology), DrNB (Surgical Gastroenterology)
गुजरात मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत, Reg. No. G-38738
गैस्ट्रो और कैंसर सर्जन · डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद

मलाशय, बड़ी आंत, पेट, लिवर और पैंक्रियास की सर्जरी का 18 वर्ष का अनुभव। मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज और जी.बी. पंत अस्पताल, दिल्ली से प्रशिक्षण।

संक्षेप में

मलाशय के कैंसर की सर्जरी का रास्ता साफ़ और क्रम से चलता है। पहले स्कैन और टीम की बैठक, फिर ऑपरेशन, अस्पताल में कुछ दिन, और उसके बाद हफ़्तों तक आराम और नियमित जांच।

हर चरण पहले से पता हो तो डर कम लगता है। कुछ समय तक शौच की आदतें बदली रहती हैं, और समय के साथ वे आमतौर पर संभल जाती हैं।

इस कैंसर के पूरे इलाज की जानकारी डॉ. हर्ष शाह के साथ मलाशय के कैंसर की सर्जरी पेज पर है। यह पेज क़दम दर क़दम बताता है कि आपके साथ क्या-क्या होगा।

ऑपरेशन से पहले की तैयारी

ऑपरेशन से पहले के हफ़्ते योजना बनाने के हैं। स्कैन से स्टेज पता चलती है, और टीम तय करती है कि पहले दवा या रेडिएशन चाहिए या नहीं।

कोलोनोस्कोपी की रिपोर्ट, बायोप्सी, पेड़ू का MRI और CT स्कैन किए जाते हैं। फिर सर्जन, कैंसर विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट मिलकर इलाज का क्रम तय करते हैं। कुछ लोगों को पहले कीमोथेरेपी के साथ रेडिएशन दिया जाता है, ताकि गांठ सिकुड़े और ऑपरेशन ज़्यादा साफ़ हो सके।

आप बेहोशी के डॉक्टर से भी मिलेंगे, और खून की जांच तथा दिल की जांच होगी। अगर स्टोमा की ज़रूरत पड़ सकती है, तो नर्स ऑपरेशन से पहले पेट पर सही जगह का निशान लगा देती है। अच्छा खाइए, चलते-फिरते रहिए और तंबाकू छोड़िए, क्योंकि जो मरीज़ पहले से तंदुरुस्त होते हैं वे जल्दी संभलते हैं।

सर्जरी का पूरा सफ़र एक नज़र में
चरणक्या होता है
योजनास्कैन, बायोप्सी, टीम की बैठक और स्टोमा पर बातचीत।
ऑपरेशन से पहलेसलाह दी गई हो तो रेडिएशन या कीमोथेरेपी, फिर कुछ हफ़्तों का आराम।
ऑपरेशन का दिनपूरी बेहोशी में दूरबीन या खुला ऑपरेशन।
अस्पताल मेंदर्द पर नियंत्रण, पहले दिन से चलना, खाना धीरे-धीरे शुरू होना।
घर पररोज़ के काम पर धीरे-धीरे लौटना, खान-पान और शौच की सलाह के साथ।
जांच की मुलाक़ातेंतय समय पर रिपोर्ट देखना, खून की जांच और स्कैन।

ऑपरेशन वाला दिन

ऑपरेशन में मलाशय को उसके आसपास की चर्बी और लसिका ग्रंथियों के साथ निकाला जाता है, और जहां संभव हो आंत को वापस जोड़ दिया जाता है।

यह पूरी बेहोशी में होता है, दूरबीन से या खुला, आपकी स्टेज और शरीर के हिसाब से। सर्जन कैंसर वाले हिस्से को एक साफ़ पोटली की तरह निकालते हैं। फिर आंत के दोनों स्वस्थ सिरों को आपस में जोड़ा जाता है।

  • नए जोड़ को भरने का समय देने के लिए कभी-कभी अस्थायी स्टोमा बनाया जाता है। वह आमतौर पर कुछ महीनों बाद बंद कर दिया जाता है।
  • गांठ बहुत नीचे हो तो स्थायी स्टोमा ही सुरक्षित रास्ता हो सकता है। इस पर ऑपरेशन के दिन से काफ़ी पहले आपसे बात की जाती है।
  • ऑपरेशन में कई घंटे लगते हैं। खत्म होने पर आपके परिवार को बता दिया जाता है।

सर्जन का चुनाव इस चरण को कैसे प्रभावित करता है, यह जानना हो तो मलाशय की गांठ का ऑपरेशन किसे करना चाहिए पढ़िए।

अस्पताल में और घर लौटकर

ज़्यादातर लोग पहले दिन सहारे से बैठ और चल पाते हैं। जल्दी चलने से खून के थक्के और छाती की तकलीफ़ का ख़तरा घटता है।

आपको दर्द की दवा और ड्रिप दी जाएगी, और थोड़े समय के लिए पेट में नली भी रह सकती है। खाना घूंट से शुरू होकर तरल, फिर नरम भोजन तक पहुंचता है, जैसे-जैसे आंत जागती है। आमतौर पर लगभग एक हफ़्ता अस्पताल में रहना होता है, पर यह हर मरीज़ में अलग होता है।

घर पर आराम कीजिए और हर दिन थोड़ा ज़्यादा चलिए। कुछ हफ़्ते भारी वज़न मत उठाइए। गाड़ी चलाने, सफ़र करने और काम पर लौटने की इजाज़त सर्जन देंगे।

बाद में शौच की आदतें

मलाशय की सर्जरी के बाद कुछ महीनों तक आंत अलग तरह से काम करती है। शुरू में बार-बार, या थोड़ा-थोड़ा शौच जाना आम बात है।

  • थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाइए, और फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाइए।
  • दिन भर पानी पीते रहिए।
  • पेड़ू की मांसपेशियों की कसरत से शौच पर क़ाबू बढ़ता है। नर्स या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट इसे सिखा सकते हैं।
  • तकलीफ़ कम न हो तो सर्जन को बताइए, क्योंकि दवाओं और छोटे बदलावों से राहत मिल सकती है।

जांच की मुलाक़ातों में आपकी शौच की आदतें, रिपोर्ट और सामान्य सेहत देखी जाती है। मुलाक़ात से पहले जो सवाल तैयार रखने चाहिए, उनके लिए अच्छे सर्जन को पसंद आने वाले सवाल देखिए।

डॉ. हर्ष शाह डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद में मरीज़ों को देखते हैं। अपने स्कैन, दूरबीन जांच और बायोप्सी की रिपोर्ट साथ लाइए। वे उन्हें आपके साथ देखेंगे और आपकी अपनी योजना का हर चरण सरल भाषा में समझाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मलाशय के कैंसर की सर्जरी के बाद अस्पताल में कितने दिन रहना पड़ता है?

आमतौर पर लगभग एक हफ़्ता, पर यह ऑपरेशन, आपकी सेहत और संभलने की रफ़्तार पर निर्भर है। योजना बन जाने के बाद सर्जन आपको साफ़ अंदाज़ा दे देंगे।

क्या मुझे स्टोमा लगेगा?

हमेशा नहीं। यह गांठ की ऊंचाई और जोड़ के भरने पर निर्भर है। जोड़ को बचाने के लिए कभी-कभी अस्थायी स्टोमा बनाया जाता है, और वह आमतौर पर बाद में बंद कर दिया जाता है।

सामान्य खाना कब शुरू हो सकता है?

अस्पताल में खाना छोटे-छोटे चरणों में शुरू होता है। ज़्यादातर लोग कुछ हफ़्तों में लगभग सामान्य भोजन पर लौट आते हैं, थोड़ा-थोड़ा खाकर और फाइबर धीरे-धीरे बदलकर।

काम पर कब लौट सकते हैं?

बैठकर किया जाने वाला काम अक्सर कुछ हफ़्तों बाद संभव होता है। भारी काम में ज़्यादा समय लगता है। घाव कैसे भर रहा है, यह देखकर सर्जन सलाह देंगे।

बाद में जांच के लिए कितनी बार आना पड़ता है?

शुरू में मुलाक़ातें पास-पास होती हैं, फिर धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं। हर बार सर्जन की योजना के हिसाब से खून की जांच और स्कैन हो सकते हैं।

डॉ. हर्ष शाह से कहां मिलें

डॉ. हर्ष शाह — डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, वासणा, अहमदाबाद
डॉ. जीवराज मेहता अस्पताल, डॉ. जीवराज मेहता मार्ग, वासणा, अहमदाबाद 380007.
परामर्श, रिपोर्ट और स्कैन की समीक्षा, ऑपरेशन और फॉलो-अप। OPD सोमवार से शनिवार, सुबह 9 से शाम 5 बजे।
अपॉइंटमेंट: +91-63555-64601 · +91-63590-11009 · अस्पताल 079-2663 6363
अस्पताल की दिशा · WhatsApp +91-63555-64601

मुख्य गाइड पर लौटें: डॉ. हर्ष शाह के साथ मलाशय के कैंसर की सर्जरी।

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Dr Harsh Shah, Gastro, Cancer & Laparoscopic Surgeon, Ahmedabad
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